स्पाइन कौन सी बीमारी है?HealthPlanet

Posted on Tue 6th Dec 2022 : 10:52

स्पाइन कौन सी बीमारी है?

स्पाइन डिसॉर्डर होने पर आपको कंधे से लेकर गर्दन और कमर में दर्द की शिकायत हो सकती है. आप गर्दन और पीठ में दर्द, जलन या चुभन सी महसूस कर सकते हैं. ब्लैडर या आंत में खराबी, जी मिचलाना, उल्टी और हाथ-पैरों मे दर्द की समस्या हो सकती है. पैरालाइज, हाथ-पैरों का सुन्न पड़ना भी स्पाइन डिसॉर्डर के वॉर्निंग साइन होते हैं.

रीढ़ की समस्याएं (Spinal problems) उन बीमारियों या चोटों को कहते हैं, जिनका असर हमारी रीढ़ पर पड़ता है. इसमें स्पाइनल स्टेनोसिस भी शामिल है. इनकी वजह से कई लक्षण दिखते हैं, जिनमें कमर के निचले हिस्से में दर्द, सुन्न हो जाना और झुनझुनी शामिल हैं. रीढ़ से जुड़ी समस्याओं के चलते कमर में दर्द हो सकता है, जो इसका एक प्रमुख लक्षण है. रीढ़ से जुड़ी कई स्थितियां हैं, जो दर्द और परेशानी का कारण बन सकती हैं. इनमें निम्न स्थितियां शामिल हैं –

आनुवांशिक कारण (genetics)
उम्र का असर (aging)
दुर्घटना (accidents)
चोट लगना (injuries)

रीढ़ में मुख्य रूप से पांच हिस्से होते हैं –

सर्वाइकल स्पाइन
थोरासिक स्पाइन
लंबर स्पाइन
सैक्रम
कोक्सीक्स

आमतौर पर ज्यादातर लोग 33 कशेरुक हड्डियों (Vertebral Bones) के साथ पैदा होते हैं, लेकिन कुछ लोगों की हड्डियां कोक्सीक्स में बचपन में एक साथ फ्यूज हो जाती हैं, इस तरह के लोगों में 24 वर्टेब्रे होते हैं. रीढ़ की हड्डी की समस्या के चलते चलने-फिरने में भी दिक्कत हो सकती है. ऑर्थोपेडिक डॉक्टर और सर्जन रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या से जूझ रहे लोगों की मदद कर सकते हैं.
रीढ़ की समस्या के आम लक्षण – Common symptoms of Spinal Condition

रीढ़ की समस्या से जुड़े लक्षण आपकी समस्या के निदान पर निर्भर करते हैं. हालांकि, रीढ़ की समस्या होने पर नीचे दिए गए लक्षणों में से कुछ या सभी लक्षण दिख सकते हैं.

कमर और गर्दन के हिस्से में दर्द
अंगों में सुन्नता आना
झुनझुनी होना
हाथ या पैर में दर्द होना या दोनों में दर्द महसूस होना

रीढ़ से जुड़ी समस्याएं – Spinal Conditions in Hindi

रीढ़ से जुड़ी समस्याओं में से एक स्पाइनल स्टेनोसिस भी है. इस समस्या में में स्पाइनल कैनाल सिकुड़ जाती है, इसमें जगह कम रह जाती है. इससे स्पाइनल कैनाल की पूरी संरचना जैसे स्पाइनल कॉर्ड, नर्व टिश्यू और सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड पर दबाव पड़ता है. इसके इलाज के तौर पर फिजिकल थेरैपी, दवाएं खाना, स्टेरॉइड इंजेक्शन और सर्जरी के विकल्प मौजूद हैं.
हर्निएटिड डिस्क – Herniated disk in Hindi

हर्निएटिड डिस्क का मतलब वर्टेब्रे के बीच की डिस्क में लगी चोट से है. इस स्थिति का अन्य नाम स्लिप डिस्क और रपचर्ड डिस्क भी है. इन डिस्क का बीच का हिस्सा सॉफ्ट, जबकि बाहरी हिस्सा कठोर होता है. जब बीच का सॉफ्ट हिस्सा, बाहर के कठोर हिस्से को बाहर की ओर धकेल देता है तो इसे हर्निएटिड डिस्क कहा जाता है. हर्निएटिड डिस्क इसके प्रकार और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करती है. इसके इलाज के तौर पर फिजिकल थेरेपी और सर्जरी का सहारा लिया जाता है.
स्कॉलियोसिस – Scoliosis in Hindi

स्कॉलियोसिस रीढ़ के लंबर और थोरासिक हिस्से का दाईं या बाईं ओर मुड़ने को कहा जाता है और आमतौर पर बढ़ती उम्र के युवाओं में यह समस्या होती है. स्कॉलियोसिस के ज्यादातर मामले मामूली होते हैं, लेकिन कुछ उम्र बढ़ने के साथ गंभीर होते जाते हैं. कुछ लोगों में इसकी वजह से किसी तरह की अपंगता आ जाती है और चेस्ट कैविटी कम होने की वजह से सांस लेने में भी तकलीफ होती है. डॉक्टर स्कॉलियोसिस का आमतौर पर इलाज नहीं करते, लेकिन कुछ मामलों में कास्ट, ब्रेस और फिजिकल थेरैपी विधि को अपनाया जाता है.
सर्वाइकल स्पोंडिलासिस – Cervical spondylosis in Hindi

सर्वाइकल स्टोंडिलासिस में व्यक्ति की डिस्क की हाइट कम होने से जुड़ी है और यह स्थिति रीढ़ के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है. इस समस्या में कई बार नस दब जाती है. यह स्थिति का इलाज इसके लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करती है. इसके इलाज में एक्सरसाइज, दवाएं खाने, फिजिकल थेरैपी और सर्जरी शामिल हैं.
स्पाइनल ऑस्टियोआर्थराइटिस – Spinal osteoarthritis in Hindi

ऑस्टियोआर्थराइटिस, गठिया का एक प्रकार है, जिसमें हड्डियों को मांसपेशियों से जोड़ने वाली लचीली हड्डी (Cartilage) कमजोर पड़ जाती है और टूट जाती है. इसकी वजह से आसपास की हड्डियों में फ्रिक्शन होने लगता है, जिसके कारण दर्द और परेशानी होती है. स्पाइनल ऑस्टियोआर्थराइटिस रीढ़ की हड्डी में होती है. ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में दर्द को कम करना, जोड़ों की मोबिलिटी को बढ़ाना, आसपास की मांसपेशियों को मजबूती देना शामिल है. एरोबिक एक्सरसाइज, केमिस्ट से दर्दनिवारक दवाएं, स्ट्रेंग्दनिंग एक्सरसाइज, फिजिकल थेरैपी, मसाज और वजन कम करना इसके इलाज के मुख्य भाग हैं. ज्वाइंट इंजेक्शन, सर्जरी आदि भी की जाती हैं
साइटिका – Sciatica in Hindi

साइटिका का मतलब ऐसे दर्द से है, जो साइटिक नर्व के साथ कमर के निचले हिस्से से पैरों तक जाता है. हालांकि, आमतौर पर दर्द शरीर के एक हिस्से को ही प्रभावित करता है. हर्निएटिड डिस्ट या बोन स्पर के कारण पिंच नर्व की वजह से साइटिका का दर्द हो सकता है. इससें सूजन कम करने के लिए ठंडी और गर्म सिकाई की जाती है. हल्की-पुल्की स्ट्रेचिंग और एक्सरसाइज करने पर साइटिका के दर्द में आराम मिल सकता है. जब दर्द ज्यादा हो तो नॉनस्टेरॉइडल एंटी इंफ्लेमेटरी ड्रग्स, मसल रिलेक्सेंट, कॉर्टिकोस्टेरॉइड, स्पाइनल मैनिपुलेशन और सर्जरी की भी आवश्यकता पड़ सकती है.
कायपोसिस – Kyphosis in Hindi

कायपोसिस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें थोरासिक स्पाइन सामने की ओर झुक जाती है. हालांकि, सभी रीढ़ की हड्डियों में कुछ डिग्री तक घुमाव होता है, लेकिन कायपोसिस के मरीजों में रीढ़ की हड्डी 50 डिग्री तक झुक जाती है. इसका इलाज रीढ़ के झुकाव पर निर्भर करता है. 60 डिग्री से कम झुकाव वाले लोगों को पेट की मांसपेशियों और पीठ को मजबूती देने के लिए फिजिकल थेरैपी कराई जाती है.
स्पाइनल कॉर्ड इंजरी – Spinal cord injury in Hindi

जब स्पाइनल कैलान में खत्म होने वाली नसें और सेल्स को नुकसान पहुंचता है तो इसे स्पाइनल कॉर्ड इंजरी कहा जाता है. इन नसों को दिमाग से सिग्नल मिलता है और फिर यह उस संदेश को पूरे शरीर को पहुंचाते हैं. अगर इन नसों और सेल्स तो ज्यादा नुकान पहुंचता है तो पैरालिसिस हो सकता है, जो टेट्राप्लेजिया या पराप्लेजिया हो सकता है. टेट्राप्लेजिया में गर्दन के निचले हिस्से में पैरालिसिस हो जाता है, जबकि पराप्लेजिया में शरीर का निचला हिस्सा प्रभावित होता है.
रीढ़ की समस्याओं का निदान – Diagnosing spinal problems

जब आपको कमर के निचले हिस्से में दर्द होता है या किसी तरह की परेशानी होती है तो डॉक्टर सबसे पहले उसके कारण को जानने की कोशिश करते हैं और इसके लिए वह कुछ टेस्ट करते हैं. ताकि वह जान सकें कि आपको परेशानी किन वजहों से हो रही है और कहीं आगे चलकर आपको चलने-फिरने में तो दिक्कत नहीं होगी. इसके लिए डॉक्टर कुछ टेस्ट करवाते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं –

एक्स-रे
सीटी स्कैन
एमआरआई स्कैन

रीढ़ की समस्याओं के संभावित कारण – Possible causes and risk factors

रीढ़ से जुड़ी समस्याएं कई कारणों से हो सकती हैं. इनमें निम्न प्रमुख रूप से शामिल हैं –

एक्सीडेंट या किसी ऊंची जगह से गिरने पर
हिंसा से प्रभावित होने पर
आनुवंशिक कारण
वजन ज्यादा होना या मोटापा
उठने-बैठने का तरीका ठीक न होना
पोषक आहार न लेना
जीवनशैली अच्छी न होना और शराब आदि पीना
एक उम्र के बाद हड्डियों में क्षरण शुरू हो जाता है, उसके कारण
चलना-फिरना कम करना या एक्टिविटी कम होना

डॉक्टर को कब दिखाएं – When to contact a doctor

अगर आपको कमर के निचले हिस्से में या रीढ़ की हड्डी और उसके आसपास कहीं पर भी लगातार या अचानक दर्द हो रहा है तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए. रीढ़ की हड्डी में किसी तरह की चोट लगने पर भी आपको डॉक्टर के पास दिखाकर निश्चित कर लेना चाहिए कि चोट गंभीर नहीं है.

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wordpress 3 years ago 5 Answer
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